मैं अच्छे दिनों का इंतजार करता रहा
कि अच्छे दिन आएंगे
मैं इंतजार करता रहा
लोग मरते रहे
मैं इंतजार करता रहा
कि मेरा प्रधान सेवक
देश को हिंसा से बचा लेगा
पर वह तो हत्यारों की मां का बेटा था
असम से हत्या का सिलसिला से चला
नहीं उससे भी पहले दाभोलकर को भी
उन्होंने मारा था
मुझे लगा कि यह नंगा नाच
अब रुक जाएगा
अखलाक की शहादत आख़री होगी
अब मेरा प्रधान सेवक जाग जाएगा
रोक लेगा अपने भाइयों को
पर यह क्या उसने कहा ताऊ की सुनो मेरी नहीं
यानी अब तक उसका समर्थन था भाइयों को
हत्या रुकी नहीं और बढ़ गई
बेकसों पर जुल्म ढाया गया
मासूमों को भी जिंदा जलाया गया
जो प्रतिरोध में किसी ने की इनाम वापसी
उसे कांग्रेस से पुकारा गया
देश का माहौल बिगड़ा हुआ
चल रही है हर तरफ तशद्दुद की हवा
में फिर भी अच्छे दिन का इंतजार करता रहा
है कि अच्छे दिन आएंगे
मैं इंतजार करता रहा भ्रष्टाचार मुक्त भारत
आतंकवाद मुक्त भारत महंगाई मुक्त भारत
काले धन की वापसी और अच्छे दिन
सब चुनावी जुमले थे
हवाई वादे थे
मेरा प्रधानमंत्री ऐसा नेता है
जिसे अपनों से ज्यादा ओरों घर
सुख देता है
मेरा प्रधानमंत्री जब देश में दिखाई देता है
तो जनता जान लेती है कि देश में हो रहे हैं चुनाव
या फिर हो रही है मन की बात
रेडियो पर
राजा के लिए देश का महत्व नहीं है
उसकी रूचि इसमें है कि
विदेशों में क्या हो रहा है
अपने देश में तबाही हो रही है
और वह भी विदेश का रोना रोरहा है
उसकी निंद्रा टूटने कि सीमा अलग-अलग है
घटना जितनी दूर होगी (देश कि सीमा से )
उतनी ही जल्दी देगा वह प्रतिकिर्या
देश कि घटनाओं का
नहीं होता उस पर कोई प्रभाव
बल्कि
बढ़ जाती है सीमा मोंन व्रत कि
हाँ जब वह फस जाता है मतवालों में
यानी शोषितों के पाले मे
निकल आते हैं घडियाली आसू
छा जाती है उसकी करूणा अखबारों में
उनके विपक्ष में विश्व विद्यालय हैं
वह छात्रों के अधिकारों के मुखालिफ है
वह छात्रों के अधिकारों के मुखालिफ है
इसलिए छात्र उनके मुखालिफ है
उनको उनको छात्रों से बेहतर तवायफ नजर आती है
क्योंकि छात्राएं डटी रहती है
लाठियों और पानी के बीच
मैदानों में